8th Pay Commission: कर्मचारियों का डीए अब 180 दिनों में 8% बढ़ा, बाकी अन्य भत्तों में होगी 25% की बढ़ोतरी 

रोज़ाना केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन और महंगाई भत्ते के बारे में ताज़ा खबरें आती रहती हैं, जो कि उन्हें एक ओर प्रसन्न करती हैं और कभी-कभी हताशा दिलाने की भी क्षमता रखती हैं। यह खबरें अक्सर उनकी आशाओं के मुताबिक़ नहीं होती, जिसका परिणामस्वरूप उनमें हताशा की भावना पैदा हो सकती है। इस पोस्ट में, हम 8वें वेतन आयोग से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों पर विस्तार से चर्चा करने का प्रयास करेंगे।

इसके साथ ही, हम देखने की कोशिश करेंगे कि कर्मचारियों को बकाया डीए एरियर का पैसा कैसे प्राप्त होगा। क्या केंद्रीय कर्मचारियों के अतिरिक्त भत्तों में किसी प्रकार की वृद्धि की जा सकती है।

कितने प्रतिशत की वृद्धि संभव है?

केंद्र सरकार वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों को प्रदान करने वाले 42% महंगाई भत्ते में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। वर्तमान समय में महत्वपूर्ण महंगाई दर में 4% की वृद्धि की संभावना है।

हालांकि, जनवरी 2024 में भी 4% की वृद्धि की संभावना है, लेकिन इससे संबंधित कोई आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है। यह खबर प्रत्येक कर्मचारी के लिए प्रसन्नता का कारण है।

यदि केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ते में वृद्धि दी जाती है और वे इसका लाभ प्राप्त करते हैं, तो इससे यह संकेत मिलता है कि पेंशन भोगी कर्मचारियों को भी इसका लाभ हो सकता है।

कैबिनेट की मंजूरी है बाकी

केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, अनुमानित रूप से 180 दिनों के भीतर सरकार डीए और डिआर में करीब 8% की वृद्धि कर सकती है।

वेतन में 4% की वृद्धि 1 जुलाई को पहले ही निर्धारित कर दी गई थी, और अब डीआर में भी इसे बढ़ाने की सम्भावना है। इस प्रसंग में, कैबिनेट की मंजूरी शीघ्र ही मिल सकती है, लेकिन इस कार्य की अब भी लंबित स्थिति है।

इस सूचना के परिणामस्वरूप, केंद्रीय कर्मचारियों की आशा है कि जनवरी 2024 में एक बार फिर से डीए में 4% की वृद्धि का मौका मिल सकता है। इस अवधि के दौरान, डीए में वृद्धि की दिशा में ग्राफ 50% तक बढ़ सकता है।

भक्ति में क्या परिवर्तन होगा?

यदि ऐसा परिवर्तन होता है, तो भत्तों में अब तक संभावित 25% की वृद्धि हो सकती है। पेंशन लेने वालों के मामले में, केंद्रीय कर्मचारियों को किसी भी स्थिति में इस मुद्दे से निकलने के लिए तैयार नहीं किया जा सका है।

जेएफआरओपीएस के सदस्य और एआईटीईएफ के महासचिव सी श्रीकुमार का कहना है कि केंद्र सरकार केंद्रीय कर्मचारियों के हितों को ध्यान में नहीं ले रही है।

10 अगस्त को संसद भवन के सामने 2,00,000 कर्मचारियों की एकत्रिति के माध्यम से पुरानी पेंशन की मांग को लेकर, सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा था।

यह आवश्यक नहीं कि केंद्र में पे रिवाइज 10 वर्ष में हो 

केंद्र सरकार में कर्मचारियों को वर्तमान में 42% के हिसाब से वेतन दिया जा रहा है। महंगाई की दर में वृद्धि के मद्देनजर, इसे आगामी समय में 4% बढ़ाने का विचार है।

जनवरी 2024 में भी 4% की बढ़ोतरी की संभावना है, जैसा कि सी श्रीकुमार ने बताया है। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने संसद में मंगलवार को यह जानकारी दी है कि वर्तमान में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की स्थापना की कोई योजना नहीं बन रही है।

केंद्र सरकार ने इस संदर्भ में किसी विचार की ओर ध्यान नहीं दिया है, जैसा कि सी श्रीकुमार ने बताया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ केंद्र सरकार की मनमर्जी है।

सातवें वेतन आयोग ने सुझाव दिया था कि वेतन आयोग की स्थापना को हर 10 वर्ष में नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद, इसकी स्पष्ट परिभाषा पीएनएस कमीशन ने नहीं दी है। इससे कुछ महीनों में वेतन आयोग की स्थापना के पश्चात् 50% से अधिक वृद्धि हो सकती है। इस परिस्थिति में, डिए और एच.आर.ए. की वृद्धि स्वतः होना पूर्व-निर्धारित है।

केंद्र सरकार ने ओपीएस की मांग के उत्तर में एनपीएस में सुधार की कमेटी की स्थापना की है। कर्मचारियों ने कभी ऐसी मांग नहीं की है। सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद एनपीएस को एक आपदा के समान माना जाता है, जिसमें कर्मचारियों को लगभग ₹4000 से ₹5000 की पेंशन मिलती है। इस परिस्थिति में, 8वें वेतन आयोग की स्थापना को लागू कराने की मांग और भी मजबूत होती जा रही है।

सरकार ने इनकार किया वेतन आयोग के प्रस्ताव को

सन् 2013 में गठित पिछले वेतन आयोग के तीन वर्षों बाद, उसकी सिफारिशें संज्ञान में लेते हुए, सन् 2026 में वेतन संशोधन की आवश्यकता है। इसके लिए, सन् 2023 में एक नया आयोग गठित करने की आवश्यकता है।

केंद्र सरकार वर्तमान में आयोग के गठन के पक्ष में है, जबकि पिछली बार किए गए आयोग के गठन को नकारने में संकोच नहीं कर रही है। संसद में इस मुद्दे पर पूछे गए सवालों का उत्तर देते हुए कहा गया है कि 2016 से 2023 के बीच कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में 42% की वृद्धि हो चुकी है।

इस समय के दौरान, देश में प्रति व्यक्ति आय में 111% की वृद्धि हो चुकी है। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने इसके परिणामस्वरूप वेतन और पेंशन के असली मूल्यों में कटौती का सुझाव दिया है, जिसे डीए/ डिआर के माध्यम से पूरा किया जाता है।

वर्तमान में, डीए 42% तक पहुंच गया है, जिसका मतलब है कि प्रति व्यक्ति आय में 3 गुना वृद्धि हुई है। इसके साथ ही, वस्तुओं के मूल्यों में भी उसी अनुपात में वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है, क्योंकि पिछले तीन वेतन आयोगों द्वारा सुझाई गई बढ़ोतरी के बावजूद भी, डीए 50% तक पहुंच जाने की संभावना है।

निष्कर्ष

इस विश्लेषण से साफ रूप से प्रकट होता है कि पिछले वेतन आयोग की सिफारिशों के परिणामस्वरूप कर्मचारियों की आय और पेंशन में वृद्धि हुई है। हालांकि, मुद्रास्फीति के परिणामस्वरूप वास्तविक मूल्यों में कटौती हो रही है, जिसका संवाद वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने दिया है।

नए वेतन आयोग के गठन की आवश्यकता है ताकि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार किया जा सके, और उनकी सामान्य जीवनस्तर में वृद्धि हो सके। इस तरह के समस्याओं का समाधान प्राधिकृत और संविदानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जा सकता है।

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