ISRO Moon Mission Chandrayaan 3 : चंद्रयान-3 की एक और छलांग, चांद से अब सिर्फ 150KM दूर भारत

Chandrayaan-3 Mission News: चंद्रयान-3 ने उपग्रह सोमवार को चंद्रमा के बहुत करीबी व्यासक्षेत्र में प्रवेश किया, जैसा कि इसरो ने बताया। इसके परिणामस्वरूप, उसका ऑर्बिट अब बहुत अधिक गोलाकार रूप लेने लगा है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) ने घोषणा की है कि उनका मून मिशन, ‘चंद्रयान-3’, अब चंद्रमा की सतह के निकटवर्ती कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंच गया है। इस सफलता के पीछे 14 जुलाई को किए गए प्रक्षेपण के बाद की मेहनत और निष्ठा का महत्वपूर्ण योगदान है। चंद्रयान-3 ने 5 अगस्त को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया था, जिससे यह अब चंद्रमा के प्रत्येक पल के नजदीक है।

Chandrayaan-3 Mission News

आगामी 16 अगस्त को, सुबह के आस-पास साढ़े आठ बजे, एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया की योजना बनाई गई है। इस प्रक्रिया के माध्यम से चंद्रयान-3 की कक्षा को और भी घटकर, 150 किलोमीटर x 177 किलोमीटर, तक कम किया जाएगा। इससे मिशन को चंद्र ध्रुव के समीप ले जाने की संभावना बढ़ेगी।

इस सफलता के साथ, चंद्रयान-3 मिशन का अग्रसर यात्रा प्रायः नए मंजिलों की ओर बढ़ रहा है। इसरो ने इस मिशन के लिए कठिनाईयों का सामना करते हुए भी निरंतर प्रयास किया है ताकि भारत एक और अद्भुत उपलब्धि हासिल कर सके।

100KM ऑर्बिट के बाद अलग हो जाएगा लैंडिंग मॉड्यूल

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सूत्रों के अनुसार, एक नई प्रक्रिया का आयोजन किया जाएगा ताकि अंतरिक्ष यान को 100 किमी की कक्षा तक पहुंचाने का काम संपन्न किया जा सके। इसके बाद, एक ‘लैंडिंग मॉड्यूल’ तैयार किया गया है जिसमें एक लैंडर और एक रोवर शामिल होंगे, और यह ‘प्रॅपल्शन मॉड्यूल’ से अलग हो जाएगा। इसके बाद, लैंडर अपनी ‘डीबूस्ट’ प्रक्रिया के माध्यम से धीमे होने की प्रक्रिया को पार करेगा और 23 अगस्त को यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने की कोशिश करेगा।

चंद्रयान-3 से पहले कैसे पहुंचेगा रूसी मिशन

‘लूना-25’ मिशन से आगे बढ़कर, चंद्रयान-3 मिशन का लक्ष्य चांद की सतह तक पहुंचना है। इसमें एक महत्वपूर्ण अंतर है – यह मिशन चंद्रयान-3 को ‘लूना-25’ के मिशन की तुलना में एक लंबा रास्ते पर ले जा रहा है। इसका कारण यह है कि चंद्रयान-3 अपने सफर के दौरान पृथ्वी और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके अपनी यात्रा को अधिक कमयाब बनाना चाहता है। इससे उसे अधिक कम ईंधन पर सफर करने का मौका मिलेगा।

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