अब आपको कोई गलत तरीके से नहीं बेच पाएगा ‘पॉलिसी’, बीमा कंपनियां आईं ओम्बुड्समैन के रडार पर

insurance companies have come under the radar of Ombudsman: एलआईसी (LIC) की पूर्व प्रबंध निदेशक सुनीता शर्मा ने कहा, ग्राहकों को बीमा पॉलिसी देखने का समय रखें। उनके अनुसार, छूट अवधि के दौरान कंपनियां संबंधित रहती हैं और फिर गायब हो जाती हैं। ग्राहकों को बीमा पॉलिसी की विचार के लिए समय रखना महत्वपूर्ण है, उनके अनुसार। शर्मा ने बताया कि कंपनियां ग्राहकों से संबंधित रहती हैं छूट की अवधि तक।

Ombudsman gave instructions to insurance companies: बीमा पॉलिसी की छूट अवधि के बाद, कंपनियां ग्राहकों से अलग हो जाती हैं। ग्राहकों को सुनीता शर्मा की सलाह है कि वे बीमा पॉलिसी की स्थिति को समय समय पर चेक करें। उनके अनुसार, बीमा पॉलिसी देखने से पहले ग्राहकों को निर्धारित समय में जाँच करना चाहिए। बीमा कंपनियों की ग्राहक सेवा के साथ जुड़ाव बढ़ाना उपयुक्त है, उनके अनुसार। सुनीता शर्मा ने कहा कि ग्राहकों को बीमा कवरेज की विशेष शर्तों को समझना चाहिए। उनका कहना है कि बीमा पॉलिसी के सारे पहलुओं को समझकर ही निर्णय लेना चाहिए।

insurance companies have come under the radar of Ombudsman

Now no one will be able to sell you a wrong ‘policy’: दिल्ली क्षेत्र की बीमा ओम्बुड्समैन सुनीता शर्मा ने सोमवार को कहा- बीमा कंपनियों को बीमा पॉलिसी की गलत तरीके से बिक्री पर लगाम लगाने की जरूरत है. ग्राहक ही राजा हैं, उनके कारण ही बीमा कंपनियां अस्तित्व में हैं. कंपनियों को उत्पादों की गलत बिक्री से बचना चाहिए. बीमा कंपनियों को ग्राहकों के हित में काम करना चाहिए. सुनीता शर्मा ने बीमा पॉलिसी की सही बिक्री की बजाय बढ़ी सुरक्षा की मांग की. ग्राहकों को सही जानकारी और स्पष्टता मिलनी चाहिए. बीमा कंपनियों को उच्च मानकों पर ध्यान देना चाहिए. ग्राहक सभी बातें जानकर अपने हित में निर्णय करें. उत्पादों की सफल बिक्री के लिए ग्राहक-कंपनी साथ में काम करें.

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insurance companies have come under the radar of Ombudsman –ओम्बुड्समैन ने किस बात पर जताई आपत्ति?

  • सुनीता शर्मा, पूर्व LIC प्रबंध निदेशक, बताईं कि बीमा पॉलिसी की छूट अवधि में कंपनियां गायब हो सकती हैं।
  • बीमा पॉलिसीधारकों को 15 दिन की समय सीमा मिलती है नियमों की समीक्षा और वापसी के लिए।
  • इलेक्ट्रॉनिक पॉलिसी में यह समय 30 दिन होता है, जो और भी अधिक है।
  • शर्तों की अनुसरण के बाद पॉलिसीधारक गलत बिक्री का दावा करने में सक्षम होते हैं।
  • ग्राहकों को चाहिए अपनी पॉलिसी की स्थिति को नियमित रूप से चेक करना।
  • छूट अवधि के बाद, कंपनियां संपर्क में रहती हैं, लेकिन फिर गायब हो सकती हैं।
  • सुनीता शर्मा ने कहा कि पॉलिसीधारकों को स्वीकार्यता की समीक्षा करनी चाहिए।
  • नियमों के खिलाफ, पॉलिसी को 15 दिन के भीतर वापस करने का अधिकार होता है।
  • इस अवधि में, ग्राहक गलत बिक्री के खिलाफ दावा कर सकता है।
  • इसके लिए, बीमा पॉलिसीधारकों को सतर्क रहना चाहिए और नियमों का पालन करना चाहिए।

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बीमा लोकपाल करते हैं शिकायतों का समाधान

  • बीमा लोकपाल शिकायतों का समाधान करते हैं।
  • बीमा कंपनियों से शिकायतें हैं दर्ज।
  • पॉलिसी दस्तावेज समय पर नहीं आते।
  • सलाह: दस दिनों में भेजें दस्तावेज।
  • शिकायतों का निपटान अर्ध-न्यायिक।
  • नियमों का पालन करें बीमा कंपनियों का।
  • सेल्फ कंटेन्ड नोट सही दस्तावेज है।
  • बीमा लोकपाल सुनते हैं ग्राहकों की बातें।
  • शिकायतें हल हों तात्काल।
  • दस दिनों का समय अवश्य ध्यान में रखें।

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थर्ड पार्टी एडमिन की भूमिका की जांच की भी जरूरत

  • सुनीता शर्मा ने टीपीए प्रशासकों की भूमिका की समीक्षा की मांग की है।
  • बीमाकर्ता उनसे प्रभावित होने की बात पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • 2022-23 में बीमा लोकपाल कार्यालयों में 55,946 शिकायाएं प्राप्त हुईं।
  • 92.28% शिकायाएं बीमा लोकपाल के कार्यालयों ने निपटाईं।
  • बीमा लोकपाल ने 51,625 शिकायाओं का संक्षेप से निपटाया।
  • वित्त वर्ष 2022-23 में दिल्ली ने 5,257 शिकायाएं सुलझाईं।
  • ‘बीमा लोकपाल’ संस्था का स्थापना दिवस 11 नवंबर को मनाया जाता है।
  • सुनीता शर्मा ने बीमा लोकपाल दिवस पर संबंधित पक्षों से बातचीत की।
  • दिल्ली केंद्र ने 2022-23 में सभी 5,257 शिकायाओं का समाधान किया।
  • ‘बीमा लोकपाल’ संस्थान के स्थापना दिवस को 11 नवंबर को मनाते हैं।
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